रविवार, 22 मार्च 2026

MP Teacher Recruitment: 10 हजार पदों की मांग, तीन प्रदर्शनों के बाद अब 24 मार्च को भोपाल में धरना

मध्य प्रदेश: एक लाख से अधिक शिक्षक पद रिक्त, तीन प्रदर्शनों के बाद भी नहीं बनी बात, अब 24 मार्च को चौथा आंदोलन

मध्य प्रदेश में शिक्षक भर्ती को लेकर अभ्यर्थियों का आंदोलन अब चौथे चरण में प्रवेश कर रहा है। प्रदेश के सरकारी स्कूलों में एक लाख से अधिक शिक्षकों के पद खाली होने के बावजूद भर्ती प्रक्रिया में पदों में वृद्धि न किए जाने से नाराज अभ्यर्थी 24 मार्च को भोपाल में बड़े प्रदर्शन की तैयारी में हैं। पिछले तीन आंदोलनों में सरकार से ठोस परिणाम न मिलने के बाद इस बार अभ्यर्थियों ने आर-पार की रणनीति अपनाई है।

MP Teacher Recruitment: 10 हजार पदों की मांग

तीन बार प्रदर्शन, अब तक कोई ठोस हल नहीं

प्रदेश के वर्ग-2 (माध्यमिक) और वर्ग-3 (प्राथमिक) शिक्षक भर्ती के अभ्यर्थी पिछले कई महीनों से सड़कों पर हैं। नवंबर 2025 से फरवरी 2026 के बीच वे तीन बार राजधानी भोपाल में बड़े स्तर पर प्रदर्शन कर चुके हैं। इन आंदोलनों के दौरान अभ्यर्थियों ने धरना-प्रदर्शन किया और रैलियां निकालीं, लेकिन अब तक उन्हें प्रशासनिक आश्वासनों के अलावा कोई ठोस परिणाम नहीं मिला है। अभ्यर्थियों का कहना है कि बार-बार के प्रदर्शनों के बावजूद जब सरकार की ओर से कोई निर्णय नहीं लिया जा रहा, तो यह युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ है।

24 मार्च को भोपाल में चौथा प्रदर्शन, अनिश्चितकालीन आंदोलन की चेतावनी

लगातार अनदेखी से नाराज अभ्यर्थियों ने अब 24 मार्च को एक बार फिर भोपाल में विशाल धरना-प्रदर्शन का ऐलान किया है। इस बार आंदोलन को पिछले मुकाबले अधिक व्यापक और लंबा बनाने की योजना बनाई जा रही है। प्रदेश के विभिन्न जिलों से हजारों की संख्या में अभ्यर्थियों के राजधानी पहुंचने की संभावना है। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यदि इस बार भी सरकार ने उनकी मांगों पर सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो आंदोलन को अनिश्चितकालीन कर दिया जाएगा और इसे प्रदेशव्यापी स्वरूप दिया जाएगा।

विधानसभा के आंकड़े बताते हैं शिक्षकों की भारी कमी

प्रदेश की सरकारी शिक्षा व्यवस्था में शिक्षकों की कमी को लेकर विधानसभा में पेश आंकड़े चिंताजनक स्थिति दर्शाते हैं। आधिकारिक जानकारी के अनुसार, प्रदेश में शिक्षकों के कुल स्वीकृत पदों की संख्या 2,89,005 है। इनमें से वर्तमान में केवल 1,74,419 शिक्षक कार्यरत हैं, जबकि रिक्त पदों की संख्या 1,15,678 है। यानी कुल पदों का लगभग 40 प्रतिशत हिस्सा खाली पड़ा है। यह आंकड़ा अकेले शिक्षकों की कमी को रेखांकित करता है।

स्कूलों की स्थिति भी चिंता का विषय

सिर्फ पद खाली होने का आंकड़ा ही नहीं, बल्कि स्कूलों में शिक्षकों की तैनाती की स्थिति भी गंभीर है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, प्रदेश में 1,968 ऐसे स्कूल हैं जहां केवल एक ही शिक्षक है। वहीं, 46,417 स्कूल ऐसे हैं जहां केवल दो शिक्षक ही तैनात हैं। ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता पर सीधा असर पड़ना स्वाभाविक है, जिसे अभ्यर्थी अपनी मांगों का एक प्रमुख आधार बना रहे हैं।

पिछले आंदोलन में उग्र हुए थे अभ्यर्थी

फरवरी में हुए पिछले प्रदर्शन के दौरान अभ्यर्थियों ने अपनी नाराजगी को चरम रूप देते हुए मुंडन करवाया और अपनी मार्कशीट को आग के हवाले कर दिया था। इस आक्रोश के बावजूद सरकार की ओर से कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया। अभ्यर्थियों का कहना है कि जब इतनी बड़ी संख्या में पद खाली हैं, तो भर्ती प्रक्रिया में पद बढ़ाने में देरी क्यों की जा रही है, यह समझ से परे है।

अभ्यर्थियों की प्रमुख मांगें

आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने अपनी मांगों को स्पष्ट रूप से रखा है:

वर्ग-2 भर्ती: इसमें कम से कम 10,000 पद किए जाएं और हर विषय में पर्याप्त पदवृद्धि सुनिश्चित की जाए।

1. वर्ग-3 भर्ती: पदों की संख्या बढ़ाकर न्यूनतम 25,000 किया जाए।

2.प्रक्रियागत मांग: दूसरी काउंसलिंग की प्रक्रिया जल्द से जल्द शुरू की जाए।

3. विशेष शिक्षक: 3,200 विशेष शिक्षक पदों के लिए अलग से भर्ती प्रक्रिया निकाली जाए।

अब सरकार और प्रशासन की ओर से इस चौथे आंदोलन से पहले क्या पहल की जाती है और अभ्यर्थियों की मांगों पर क्या निर्णय लिया जाता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा।

नोट: यह खबर उपलब्ध जानकारी और विभिन्न मीडिया स्रोतों पर आधारित है। समाचार लिखे जाने के समय तक प्राप्त तथ्यों के अनुसार प्रस्तुत किया गया है। स्थिति में बदलाव संभव है और आधिकारिक पुष्टि के बाद अपडेट किया जा सकता है। 

Cyber Security क्या है? पूरी जानकारी, प्रकार, खतरे और बचाव के तरीके | Complete Guide in Hindi

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें