भोपाल में स्मार्ट मीटर लगने के बाद बिजली चोरी पकड़ने का तरीका पूरी तरह बदल गया है। अब बिना किसी शिकायत के ही ये मीटर तुरंत अलर्ट भेज कर चोरी की सूचना दे देते हैं। पिछले दो महीनों में इस तकनीक से 900 से अधिक मामलों का पता चला है।
भोपाल: बिजली चोरी की पारंपरिक शिकायत प्रणाली अब पुरानी हो चुकी है। स्मार्ट मीटरों ने इस खेल को पूरी तरह बदल दिया है। अब जैसे ही कोई बिजली चोरी का प्रयास करता है, मीटर तुरंत कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज देता है। इसके बाद विजिलेंस टीम मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करती है, और यह सब कुछ बिना किसी बाहरी शिकायत के होता है।
स्मार्ट मीटर कैसे पकड़ता है चोरी?
बिजली कंपनी के अधिकारियों के अनुसार, स्मार्ट मीटर बिजली चोरी के कई तरीकों पर नजर रखते हैं। अगर कोई मीटर की सील तोड़ता है, उसे खोलने की कोशिश करता है, या सीधे खंभे से तार जोड़कर बिजली लेता है, तो मीटर तुरंत इस गड़बड़ी को रिकॉर्ड कर लेता है। यह जानकारी तुरंत सेंट्रल सर्वर पर भेज दी जाती है, जिससे विजिलेंस टीम को तुरंत कार्रवाई का मौका मिलता है।
सुभाष कॉलोनी में 2.35 लाख का बिल
हाल ही में सुभाष कॉलोनी में एक मामला सामने आया। यहां गीता तेंदुलकर के तीन मंजिला मकान में तीन किरायेदारों ने बिना मीटर के सीधे बिजली के खंभे से तार जोड़कर बिजली चोरी की थी। जब विजिलेंस टीम पहुंची, तो राजू तेंदुलकर ने तार हटाने की कोशिश की, लेकिन तब तक स्मार्ट मीटर अलर्ट भेज चुका था। निरीक्षण में करीब 18 किलोवॉट की अवैध बिजली लोड पकड़ी गई, जिसके बाद 2.35 लाख रुपये का बिल बनाया गया।
दूसरे इलाकों में भी मिले मामले
इसी तरह राहुल नगर में मीटर की आने वाली लाइन में अवैध कट लगाकर बिजली चोरी का मामला पकड़ा गया। यहां 5 किलोवॉट का अवैध लोड था और करीब 90 हजार रुपये का बिल बनाया गया। सुंदर नगर में एक मकान मालिक नौ कमरों को सीधे खंभे से बिजली सप्लाई कर रहा था, जहां 9 किलोवॉट का अवैध लोड पाया गया।
दो महीने में 900 से अधिक मामले
बिजली कंपनी के अनुसार, डिजिटल मॉनिटरिंग से कार्रवाई को काफी मजबूती मिली है। पिछले दो महीनों में 900 से अधिक और पिछले तीन महीनों में 1,000 से अधिक बिजली चोरी के मामले पकड़े गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि अधिकतर चोरी रात या सुबह-सुबह होती है, इसलिए विजिलेंस टीमें सुबह 6 बजे से विशेष अभियान चला रही हैं। इन अभियानों में लाखों रुपये के बिल जारी किए गए हैं। स्मार्ट मीटरों से अब बिजली चोरी बहुत तेजी से पकड़ी जा सकती है, जिससे शिकायतों पर निर्भरता कम हुई है और तुरंत कार्रवाई संभव हुई है।
