श्रीलंका क्रिकेट के इतिहास में 18 अगस्त 2026 का दिन एक अनोखी घटना के तौर पर दर्ज किया जाएगा। गाले में भारत के खिलाफ जारी पहले टेस्ट मैच के चौथे दिन एक युवा बल्लेबाज ने अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में पदार्पण किया। हालांकि, यह पदार्पण किसी सामान्य मौके पर नहीं हुआ। पासिंदु सूरियाबंदारा ने कंप्यूशन सब्स्टीट्यूट (Concussion Substitute) के तौर पर यह मौका हासिल किया। यह टेस्ट क्रिकेट के इतिहास की उन दुर्लभ घटनाओं में से एक है, जिसमें कोई खिलाड़ी बिना प्लेइंग इलेवन का हिस्सा हुए मैदान पर उतरता है और अपनी टीम के लिए संकट की घड़ी में योगदान देता है।
यह घटना क्रिकेट जगत में सुर्खियों का विषय बनी। जब वरिष्ठ बल्लेबाज दिनेश चंडीमल मैदान पर फील्डिंग के दौरान चोटिल हो गए, तो श्रीलंकाई टीम प्रबंधन के सामने बड़ी चुनौती थी। मैच रेफरी ने सूरियाबंदारा को चंडीमल के विकल्प के तौर पर मंजूरी दी। यह केवल तीसरा अवसर था जब किसी श्रीलंकाई खिलाड़ी को टेस्ट में कंप्यूशन सब के तौर पर मैदान में उतरने का मौका मिला। यह लेख आपको पासिंदु सूरियाबंदारा की पूरी कहानी, उनके करियर, आंकड़ों और इस दुर्लभ डेब्यू की पृष्ठभूमि के बारे में विस्तार से बताएगा।
दिनेश चंडीमल को कैसे लगी चोट और क्या थी पूरी घटना?
गाले टेस्ट मैच का चौथा दिन काफी रोमांचक था। भारतीय टीम अपनी दूसरी पारी खेल रही थी और श्रीलंकाई खिलाड़ी मैदान पर अपनी सर्वश्रेष्ठ फील्डिंग कर रहे थे। पहली पारी में दिनेश चंडीमल बल्लेबाजी करने आए थे, लेकिन वे सिर्फ 4 रन ही बना सके। चौथे दिन जब भारत की दूसरी पारी का चौथा ओवर चल रहा था, तभी एक अप्रिय घटना घटी।
केएल राहुल ने एक शॉट खेला और चंडीमल ने उसे रोकने के लिए गोताखोरी (dive) लगाई। इस दौरान उनका संतुलन बिगड़ गया और वे अजीब तरीके से गिरे। उनके दाहिने कंधे और गर्दन पर गंभीर चोट आई। मैदान पर मौजूद फिजियोथेरेपिस्ट और डॉक्टर ने तुरंत उनकी जांच की और प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें अस्पताल ले जाने का फैसला किया गया। श्रीलंका क्रिकेट बोर्ड ने एक बयान में पुष्टि की कि उन्हें एहतियाती स्कैन के लिए अस्पताल ले जाया गया। बाद में स्कैन रिपोर्ट साफ आई, जिसमें किसी आंतरिक चोट के संकेत नहीं मिले।
कंप्यूशन सब्स्टीट्यूट के नियम क्या हैं?
क्रिकेट में कंप्यूशन या हेड इंजरी के मामलों में आईसीसी ने सख्त नियम बनाए हैं। अगर कोई खिलाड़ी हेड या गर्दन की चोट (जिसमें कंप्यूशन या संदिग्ध कंप्यूशन शामिल हो) के कारण मैच से बाहर हो जाता है, तो टीम को उसकी जगह एक “लाइक-फॉर-लाइक” (समान भूमिका वाला) रिप्लेसमेंट लेने की अनुमति होती है। इसकी अनुमति मैच रेफरी द्वारा दी जाती है।
यह नियम 1 अगस्त 2019 को लागू हुआ था। इसका उद्देश्य खिलाड़ियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देना है। पहले कई बार कंप्यूशन के बावजूद बल्लेबाज बल्लेबाजी करते रहते थे, लेकिन अब आईसीसी इस मामले में बेहद सख्त है। किसी खिलाड़ी के कंप्यूशन सब के रूप में आने पर मैच रेफरी का अंतिम निर्णय होता है, और एक बार कंप्यूशन की पुष्टि होने पर वह खिलाड़ी मैच के बाकी हिस्से में वापस नहीं आ सकता।

पासिंदु सूरियाबंदारा कौन हैं? एक नजर उनके करियर पर
पासिंदु सूरियाबंदारा श्रीलंका के कोलंबो में 19 अक्टूबर 1999 को पैदा हुए। उनका पूरा नाम डॉन पासिंदु संजुला सूरियाबंदारा है। वह दाएं हाथ के शीर्ष क्रम के बल्लेबाज हैं और ऑफ ब्रेक गेंदबाजी भी करते हैं। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कोलंबो के प्रतिष्ठित रॉयल कॉलेज से प्राप्त की।
सूरियाबंदारा ने घरेलू क्रिकेट में अपनी पहचान एक शानदार बल्लेबाज के रूप में बनाई है। उन्होंने 2018 में सिंहलीज़ स्पोर्ट्स क्लब के लिए प्रथम श्रेणी क्रिकेट में पदार्पण किया। 2021 में वह मूर्स स्पोर्ट्स क्लब में शामिल हुए। वह ‘गाले’ टीम और ‘गाले मार्वल्स’ (लंका प्रीमियर लीग) के लिए भी खेल चुके हैं।
शानदार प्रथम श्रेणी रिकॉर्ड: आंकड़ों की जुबानी
पासिंदु सूरियाबंदारा के प्रथम श्रेणी (First-Class) आंकड़े बेहद शानदार हैं। 68 मैचों में उन्होंने लगभग 4900 रन बनाए हैं, जिसमें उनका औसत 54.36 का है। इस दौरान उनके नाम 14 शतक और 23 अर्धशतक हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर 242 रन है।
प्रथम श्रेणी क्रिकेट में 54 से अधिक की औसत किसी भी बल्लेबाज के लिए बेहद शानदार मानी जाती है। यह आंकड़ा बताता है कि सूरियाबंदारा लंबी पारियां खेलने की क्षमता रखते हैं और विकट परिस्थितियों में भी रन बना सकते हैं। उनके 14 शतक भी इस बात का प्रमाण हैं कि वह बड़े स्कोर बनाने में माहिर हैं।

दोहरे शतक: यादगार पारियां
सूरियाबंदारा ने अपने करियर में कई बड़ी पारियां खेली हैं। उनके दोहरे शतकों की सूची उनकी क्षमता को दर्शाती है:
अप्रैल 2024 में, नेशनल सुपर लीग में गाले की ओर से खेलते हुए उन्होंने जाफना के खिलाफ 346 गेंदों में 17 चौकों की मदद से 242 रन बनाए। इससे पहले 2023 में, उन्होंने कैंडी के खिलाफ 214 रन की पारी खेली थी। 4 जनवरी 2025 को, एसएलसी मेजर क्लब टूर्नामेंट में तमिल यूनियन के खिलाफ खेलते हुए सूरियाबंदारा ने नाबाद 200 रन की पारी खेली। इस पारी में 18 चौके और 3 छक्के शामिल थे। मूर्स एससी ने इस मैच में 476/8 का स्कोर घोषित किया था।
अंडर-19 और श्रीलंका ‘ए’ में योगदान
पासिंदु सूरियाबंदारा का चयन सिर्फ घरेलू क्रिकेट तक सीमित नहीं है। उन्होंने 2018 में श्रीलंका अंडर-19 टीम का प्रतिनिधित्व किया। अंडर-19 टेस्ट में उन्होंने 57.50 की औसत से 230 रन बनाए, जिसमें इंग्लैंड अंडर-19 के खिलाफ 115 रन की शतकीय पारी शामिल है।
इसके अलावा, वह श्रीलंका ‘ए’ टीम के कप्तान भी रहे हैं। 2024 में अफगानिस्तान ‘ए’ के खिलाफ चार दिवसीय मैच के लिए उन्हें कप्तान नियुक्त किया गया था। इसके बाद वे दक्षिण अफ्रीका और ऑस्ट्रेलिया दौरों पर भी श्रीलंका ‘ए’ टीम की कप्तानी कर चुके हैं। कप्तानी का यह अनुभव उनके नेतृत्व कौशल को दर्शाता है और भविष्य में श्रीलंका की सीनियर टीम के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकता है।

गाले टेस्ट: डेब्यू और मैच का हाल
जब सूरियाबंदारा ने चौथे दिन मैदान में कदम रखा, तो श्रीलंका के सामने जीत के लिए 372 रनों का लक्ष्य था। भारत ने अपनी दूसरी पारी 193 रन पर समेटी थी। कंप्यूशन सब के तौर पर आने वाले खिलाड़ी पर हमेशा दबाव होता है, क्योंकि उन्हें तुरंत तालमेल बिठाना होता है।
हालांकि, सूरियाबंदारा के लिए यह एक सुनहरा अवसर था। उन्होंने भारत के खिलाफ टेस्ट सीरीज से पहले प्रैक्टिस मैच में श्रीलंका क्रिकेट इलेवन के लिए खेलकर खुद को तैयार किया था। उनकी भूमिका इसी तरह के संकट के समय टीम को संभालने के लिए थी, और जब मौका मिला तो उन्होंने इसे हाथ से नहीं जाने दिया।
कंप्यूशन सब्स्टीट्यूट का इतिहास: पहली बार कब हुआ था इस्तेमाल?
कंप्यूशन सब्स्टीट्यूट नियम टेस्ट क्रिकेट में पहली बार 2019 एशेज सीरीज के दौरान इस्तेमाल किया गया था। ऑस्ट्रेलिया के मार्नस लाबुशेन ने स्टीव स्मिथ के कंप्यूशन सब के तौर पर यह इतिहास रचा था। स्मिथ को जोफ्रा आर्चर की तेज गेंद सिर पर लगी थी, जिसके बाद वह मैच के बाकी हिस्से में नहीं खेल पाए।
लाबुशेन ने उस मैच में 59 रन की महत्वपूर्ण पारी खेली, जिसने ऑस्ट्रेलिया को मैच बचाने में मदद की। यह कंप्यूशन सब नियम की सफलता का पहला बड़ा उदाहरण था। तब से लेकर अब तक अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में कई खिलाड़ी कंप्यूशन सब के तौर पर मैदान पर उतरे हैं।
कैसा रहा सूरियाबंदारा का प्रदर्शन?
गाले टेस्ट में सूरियाबंदारा का प्रदर्शन मिश्रित रहा। एक युवा खिलाड़ी के लिए अचानक टेस्ट मैच में आना, वो भी कंप्यूशन सब के तौर पर, बेहद चुनौतीपूर्ण होता है। उन्होंने अपनी बल्लेबाजी में धैर्य दिखाया और लंबी पारी खेलने की कोशिश की। उनके डेब्यू ने निश्चित रूप से श्रीलंका क्रिकेट को भविष्य के लिए एक नया चेहरा दिया है।

गाले टेस्ट की पृष्ठभूमि: पहले तीन दिनों का हाल
इस टेस्ट मैच की शुरुआत भारत के शानदार प्रदर्शन के साथ हुई थी। भारत ने पहली पारी में 462 रन बनाए। जवाब में श्रीलंका की टीम 284 रन पर ऑलआउट हो गई। श्रीलंका की पारी में सोनल दिनुशा ने 100 रन की शानदार शतकीय पारी खेली, जबकि निरोशन डिकवेला ने 80 रन बनाए। इन दोनों के बीच छठे विकेट के लिए 146 रन की साझेदारी हुई।
भारत की पारी में मनव सुथर (चार विकेट) और रवींद्र जडेजा (तीन विकेट) मुख्य गेंदबाज रहे। तीसरे दिन के अंत तक भारत ने 178 रनों की बढ़त बना ली थी। चौथे दिन भारत ने अपनी दूसरी पारी में 193 रन बनाए, जिसके बाद श्रीलंका को 372 रनों का लक्ष्य मिला।
सूरियाबंदारा का भविष्य: क्या होगा आगे?
इस दुर्लभ डेब्यू ने सूरियाबंदारा को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मंच पर पहचान दिलाई है। हालांकि यह डेब्यू एक विकल्प के तौर पर हुआ, लेकिन गाले टेस्ट में उनके प्रदर्शन ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। श्रीलंका क्रिकेट में वरिष्ठ खिलाड़ियों के संन्यास के बाद, टीम को युवा बल्लेबाजों की जरूरत है।
श्रीलंका के लिए यह संक्रमण काल काफी महत्वपूर्ण है। अनुभवी खिलाड़ियों के जाने के बाद युवा खिलाड़ियों को मौका देना होगा। सूरियाबंदारा, अपने घरेलू रिकॉर्ड के आधार पर, नियमित टीम में जगह बनाने के प्रबल दावेदार हैं। पहले टेस्ट के लिए श्रीलंका की 16 सदस्यीय टीम में उनका नाम शामिल था, जो दर्शाता है कि चयनकर्ता उन्हें भविष्य के लिए तैयार कर रहे हैं।

आईपीएल और टी20 करियर पर एक नजर
हालांकि सूरियाबंदारा ने अभी तक इंडियन प्रीमियर लीग (IPL) में खेलने का मौका नहीं मिला है, लेकिन उन्होंने टी20 क्रिकेट में भी अपनी छाप छोड़ी है। उन्होंने 25 टी20 मैचों में 401 रन बनाए हैं, जिसमें उनका सर्वोच्च स्कोर 58 रन है और औसत 33.41 है। उन्होंने लंका प्रीमियर लीग (LPL) में गाले मार्वल्स का प्रतिनिधित्व किया है, जो अनुभव के लिए काफी महत्वपूर्ण है।
एक अनोखी शुरुआत और उम्मीदों की नई किरण
पासिंदु सूरियाबंदारा की कहानी क्रिकेट की अप्रत्याशित प्रकृति को दर्शाती है। जब एक दरवाजा बंद होता है (चंडीमल की चोट), तो दूसरा खुलता है (सूरियाबंदारा के लिए पदार्पण)। गाले टेस्ट में उनका यह कदम भले ही एक आपात स्थिति के रूप में आया हो, लेकिन इसने क्रिकेट जगत को एक होनहार बल्लेबाज से परिचित कराया।
एक शानदार घरेलू रिकॉर्ड, दोहरे शतकों की सूची, और श्रीलंका ‘ए’ की कप्तानी, यह सब उनके भविष्य के लिए अच्छे संकेत हैं। वह श्रीलंका क्रिकेट की उस पीढ़ी का प्रतिनिधित्व करते हैं जो संकट के समय में आगे आना जानती है। कंप्यूशन सब के तौर पर उनका यह डेब्यू टेस्ट क्रिकेट के इतिहास में एक दुर्लभ घटना के रूप में दर्ज रहेगा।
अब देखना यह होगा कि वह इस डेब्यू के बाद किस तरह से अपने करियर को आगे बढ़ाते हैं। अगर वह अपने घरेलू क्रिकेट के लय को अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में बरकरार रख पाते हैं, तो निस्संदेह वह श्रीलंका के लिए भविष्य के स्तंभ साबित हो सकते हैं। उनका चयन पहले टेस्ट के लिए 16 सदस्यीय टीम में ही किया गया था, जो चयनकर्ताओं के उन पर विश्वास को दर्शाता है।







