चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने नेपाल के लिए एक बड़ी चेतावनी जारी की है। चीन का कहना है कि नेपाल में छोचेन खोला नदी के आसपास के ग्लेशियर अभी भी ढहने के खतरे से ग्रस्त हैं। यदि यह ग्लेशियर टूटता है, तो नेपाल में एक बार फिर भीषण बाढ़ और तबाही आ सकती है। यह खतरा तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में पहले हुई ग्लेशियर टूटने की घटना से जुड़ा है।
नेपाल अभी पिछली आपदा से उबर नहीं पाया था कि एक बार फिर भीषण जलप्रलय का खतरा मंडरा रहा है। पिछली बार चीन ने इसकी जानकारी नहीं दी थी, लेकिन इस बार चीन के जल संसाधन मंत्रालय ने साफ तौर पर कहा है कि नेपाल पर एक और आपदा का साया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नेपाल में छोचेन खोला नदी के इंपैक्ट क्रेटर के आसपास के ग्लेशियर अभी भी और ढहने की आशंका से ग्रस्त हैं। अगर ऐसा होता है, तो एक बार फिर नेपाल में बड़ी तबाही आ जाएगी। इस खतरे का बैकग्राउंड तिब्बत के ग्यिरोंग काउंटी में ग्लेशियर टूटने और मलबे के बहने की घटना से जुड़ा है।
रिमोट-सेंसिंग इमेजरी में क्या पता चला
ग्लोबल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, हालिया रिमोट-सेंसिंग इमेजरी के तुलनात्मक विश्लेषण से पता चला है कि ग्यिरोंग सांगपो नदी बेसिन में पहले चिह्नित 14 ग्लेशियल झीलों के जल सतह क्षेत्र में कोई खास बदलाव नहीं आया है और वे कुल मिलाकर स्थिर हैं। मंगलवार सुबह 8 बजे ड्रोन से ली गई तस्वीरों के अनुसार, छोचेन खोला नदी के इंपैक्ट क्रेटर में जमा पानी काफी हद तक निकल चुका है और नीचे की ओर नदी सामान्य रूप से बह रही है, लेकिन क्रेटर के आसपास ग्लेशियर ढहने का जोखिम अब भी बना हुआ है। यही जोखिम नेपाल के लिए सबसे बड़ी चिंता का विषय है।
चीन का जल संसाधन मंत्रालय लगातार बैठकें कर रहा है और इस आपदा से जुड़े जोखिम का आकलन कर रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं और जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियल झीलें और अस्थिर बर्फ की दीवारें आम हो गई हैं। छोचेन खोला जैसे इलाकों में अगर ग्लेशियर अचानक ढह जाएं तो भारी मात्रा में बर्फ, चट्टान और पानी नीचे की ओर बह सकता है, जिससे बाढ़, मलबे का बहाव और नदी के मार्ग में अचानक बदलाव हो सकता है।
नेपाल पर मंडरा रहा खतरा
नेपाल के पहाड़ी इलाकों में पहले भी ऐसी घटनाएं जान-माल का भारी नुकसान पहुंचा चुकी हैं। हालांकि, चीन की निगरानी और आकलन सकारात्मक संकेत देते हैं कि फिलहाल ग्लेशियल झीलें स्थिर हैं और क्रेटर का पानी निकल चुका है। लेकिन ग्लेशियरों की संवेदनशीलता को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। विशेषज्ञों के मुताबिक हिमालयी ग्लेशियरों में छिपे दरारें और अस्थिर हिस्से किसी भी समय बड़े पैमाने पर पतन का कारण बन सकते हैं।
नेपाल सरकार और स्थानीय प्रशासन को इस खतरे के प्रति सतर्क रहना होगा। चीन की ओर से जारी चेतावनी इस बार नेपाल को बचा सकती है, लेकिन नेपाल को अपनी तरफ से भी अर्ली वार्निंग सिस्टम मजबूत करने, संवेदनशील क्षेत्रों में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर स्थानांतरित करने और आपदा प्रबंधन तैयारियों को तेज करने की जरूरत है। ग्लेशियर पतन से पैदा होने वाली बाढ़ अचानक और विनाशकारी होती है। समय रहते तैयारी न की गई तो छोचेन खोला इलाका एक बार फिर आपदा का केंद्र बन सकता है।







