सोशल मीडिया मंच फेसबुक पर अकाउंट निलंबित या बंद किए जाने को लेकर उपयोगकर्ताओं की शिकायतें समय-समय पर सामने आती रही हैं। कुछ उपयोगकर्ताओं का कहना है कि उनके अकाउंट पर कार्रवाई होने के बाद उन्हें इसकी स्पष्ट वजह समझने में परेशानी होती है, जबकि कई मामलों में अपील और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भी उनके लिए आसान नहीं रहती।
इसी तरह का एक मामला कुछ खबरें के संस्थापक फिरोज दरविश के साथ भी सामने आया है। उनके अनुसार, फेसबुक ने उनका अकाउंट अचानक बंद कर दिया। उन्होंने अकाउंट वापस पाने के लिए फेसबुक की अपील प्रक्रिया का सहारा लिया। इसके बाद उनसे पहचान सत्यापन के लिए पहचान पत्र मांगा गया, लेकिन पहचान पत्र दोबारा जमा करने की प्रक्रिया में समस्या आने के कारण वह आगे की प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं।
फिरोज दरविश का कहना है कि उन्होंने जानबूझकर फेसबुक की किसी नीति का उल्लंघन नहीं किया। हालांकि, फेसबुक की ओर से इस मामले में अकाउंट बंद किए जाने का कोई स्पष्ट और विशिष्ट कारण सार्वजनिक रूप से नहीं बताया गया है।
संपादकीय पारदर्शिता
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि इस रिपोर्ट में वर्णित फेसबुक अकाउंट बंद होने की घटना कुछ खबरें के संस्थापक फिरोज दरविश के साथ हुई है।
कुछ खबरें अपने पाठकों के सामने इस तथ्य को छिपाना नहीं चाहता। हालांकि, इस रिपोर्ट का उद्देश्य केवल अपने संस्थापक का अकाउंट वापस दिलाने की मांग करना नहीं है। इसका व्यापक सवाल यह है कि यदि किसी वास्तविक उपयोगकर्ता के अकाउंट पर गलत या स्वचालित कार्रवाई हो जाए, तो उसके पास प्रभावी अपील और मानवीय समीक्षा का कितना अवसर उपलब्ध है।

अकाउंट बंद होने के बाद क्या होता है?
फेसबुक की आधिकारिक जानकारी के अनुसार, निलंबित अकाउंट के खिलाफ निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपील की जा सकती है। यदि अपील सफल नहीं होती है, तो अकाउंट स्थायी रूप से बंद किया जा सकता है।
यहीं से कई उपयोगकर्ताओं के लिए परेशानी शुरू हो सकती है। यदि किसी व्यक्ति को लगता है कि उसके अकाउंट पर गलती से कार्रवाई हुई है, तो अपील और पहचान सत्यापन उसके लिए अकाउंट वापस पाने का प्रमुख रास्ता बन जाता है।
लेकिन यदि पहचान सत्यापन के दौरान तकनीकी समस्या आ जाए या अपील की प्रक्रिया आगे न बढ़े, तो उपयोगकर्ता के सामने अपनी समस्या की दोबारा समीक्षा कराने के विकल्प सीमित हो सकते हैं।
स्वचालित निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल
मेटा जैसे बड़े सोशल मीडिया मंच बड़ी संख्या में अकाउंट और सामग्री की निगरानी के लिए स्वचालित प्रणालियों, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और अन्य तकनीकों का इस्तेमाल करते हैं, स्वचालित निगरानी का उद्देश्य हानिकारक सामग्री और नियमों के उल्लंघन को तेजी से पहचानना है। लेकिन किसी भी स्वचालित प्रणाली में गलत पहचान की संभावना से पूरी तरह इनकार नहीं किया जा सकता।
ऐसे में महत्वपूर्ण सवाल यह है कि यदि किसी वास्तविक उपयोगकर्ता के अकाउंट पर गलत कार्रवाई हो जाए, तो उसे मानवीय स्तर पर समीक्षा कराने की सुविधा कितनी आसानी से उपलब्ध होती है? उपयोगकर्ता के लिए यह जानना भी महत्वपूर्ण है कि उसके अकाउंट पर कार्रवाई किस आधार पर हुई और यदि प्रणाली से गलती हुई है तो उसे सुधारने का प्रभावी रास्ता क्या है।
भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए पारदर्शिता क्यों जरूरी?
भारत फेसबुक के बड़े उपयोगकर्ता आधार वाले देशों में शामिल है। ऐसे में अकाउंट निलंबन, अपील और पहचान सत्यापन की प्रक्रिया भारतीय उपयोगकर्ताओं के लिए स्पष्ट और आसानी से उपलब्ध होना महत्वपूर्ण है, मेटा ने भारत में शिकायत निवारण की व्यवस्था उपलब्ध कराई है, जिसके माध्यम से उपयोगकर्ता निर्धारित प्रक्रिया के तहत अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
लेकिन यदि किसी उपयोगकर्ता को अपील या पहचान सत्यापन के दौरान तकनीकी समस्या आती है, तो उसे वैकल्पिक सहायता कैसे मिलेगी यह सवाल भी महत्वपूर्ण है।

मेटा से क्या अपेक्षा?
किसी व्यक्ति का फेसबुक अकाउंट केवल एक सामाजिक मंच पर मौजूद प्रोफाइल नहीं होता। वर्षों से इसमें जमा तस्वीरें, संपर्क, संदेश, पेज, समूह और पेशेवर संबंध जुड़े हो सकते हैं।
कई लोगों के लिए फेसबुक आज संवाद, संपर्क, व्यवसाय के प्रचार और डिजिटल पहचान का भी महत्वपूर्ण माध्यम है।
इसलिए किसी अकाउंट को स्थायी रूप से बंद किए जाने की स्थिति में उपयोगकर्ता को कम से कम यह स्पष्ट जानकारी मिलनी चाहिए:
• अकाउंट पर कार्रवाई किस विशेष नीति के तहत की गई?
• निर्णय स्वचालित प्रणाली ने लिया या किसी व्यक्ति ने इसकी समीक्षा की?
• अपील की समीक्षा किस स्तर पर हुई?
• पहचान सत्यापन असफल होने की स्थिति में वैकल्पिक प्रक्रिया क्या है?
• यदि कार्रवाई गलत साबित होती है तो अकाउंट वापस पाने की व्यवस्था क्या है?
सवाल अकाउंट से आगे, मंच की जवाबदेही का भी
सोशल मीडिया मंचों को सुरक्षित रखने के लिए सामग्री की निगरानी जरूरी है। लेकिन निगरानी के साथ सटीकता, पारदर्शिता और प्रभावी अपील व्यवस्था भी उतनी ही महत्वपूर्ण हैं, यदि किसी वास्तविक उपयोगकर्ता के अकाउंट पर गलत कार्रवाई होती है, तो उसे केवल एक स्वचालित संदेश के आधार पर अपनी वर्षों पुरानी डिजिटल पहचान खोने की स्थिति में नहीं छोड़ा जाना चाहिए।
सवाल यह है कि यदि स्वचालित प्रणाली से गलती हो सकती है, तो उस गलती को सुधारने का आसान और प्रभावी रास्ता उपयोगकर्ता को कितना उपलब्ध है? यह सवाल केवल फिरोज दरविश के फेसबुक अकाउंट तक सीमित नहीं है। यह उन सभी सोशल मीडिया उपयोगकर्ताओं के लिए महत्वपूर्ण है, जो किसी मंच पर वर्षों से अपनी डिजिटल पहचान, सामग्री और पेशेवर संपर्क बना रहे हैं।
एक पारदर्शी व्यवस्था में उपयोगकर्ता को यह समझने का अधिकार होना चाहिए कि उसके अकाउंट पर क्या कार्रवाई हुई, क्यों हुई और यदि निर्णय गलत है तो उसे चुनौती देने तथा वास्तविक समीक्षा कराने का प्रभावी अवसर कैसे मिलेगा।

मेटा से जवाब की उम्मीद
फेसबुक और Meta से उम्मीद की जाती है कि अकाउंट बंद किए जाने और अपील से जुड़े मामलों में उपयोगकर्ताओं को स्पष्ट कारण, प्रभावी समीक्षा और पहचान सत्यापन में तकनीकी समस्या होने पर उचित वैकल्पिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, यदि किसी वास्तविक उपयोगकर्ता का अकाउंट गलती से बंद हो जाता है, तो उसे वापस पाने की प्रक्रिया केवल स्वचालित प्रणाली तक सीमित नहीं होनी चाहिए।
डिजिटल मंचों पर निगरानी जरूरी है, लेकिन उसके साथ जवाबदेही, पारदर्शिता और न्यायपूर्ण अपील व्यवस्था भी उतनी ही जरूरी है।
Meta का पक्ष
इस रिपोर्ट के प्रकाशन तक इस विशेष मामले पर Meta की ओर से कोई स्वतंत्र प्रतिक्रिया प्राप्त नहीं हुई है। Meta की प्रतिक्रिया प्राप्त होने पर उसे रिपोर्ट में शामिल किया जाएगा।
नोट: यह रिपोर्ट कुछ खबरें के संस्थापक फिरोज दरविश के व्यक्तिगत अनुभव तथा Facebook/Meta की सार्वजनिक रूप से उपलब्ध अपील और शिकायत निवारण प्रक्रियाओं के आधार पर तैयार की गई है। रिपोर्ट में किसी व्यापक प्रवृत्ति के संबंध में ऐसा दावा नहीं किया गया है, जिसे स्वतंत्र रूप से सत्यापित नहीं किया गया हो।







