उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद का दौरा किया, जहां उन्होंने 868 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की और दूधेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक किया। 2027 के विधानसभा चुनाव को देखते हुए इस दौरे को रणनीतिक माना जा रहा है।
उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिमी यूपी के गाजियाबाद का दो दिवसीय दौरा किया। यह दौरा महज प्रशासनिक नहीं था, बल्कि इसके पीछे गहरी राजनीतिक रणनीति मानी जा रही है।
868 करोड़ की विकास परियोजनाएं
मुख्यमंत्री ने गाजियाबाद में करीब 868 करोड़ रुपये की लागत वाली 90 जनहितकारी परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया। यह परियोजनाएं मुरादनगर और मोदीनगर विधानसभा क्षेत्रों से संबंधित हैं। इस निवेश के जरिए सरकार ने पश्चिमी यूपी को अपनी प्राथमिकता में शामिल करने का संदेश दिया है।
कांवड़ यात्रा की समीक्षा और रात्रि विश्राम
गाजियाबाद कलेक्ट्रेट में सीएम योगी ने आगामी कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को कांवड़ियों की सुरक्षा और सुविधा में कोई चूक न करने के निर्देश दिए। खास बात यह रही कि वे दौरे के बाद लखनऊ नहीं लौटे, बल्कि पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस में रुके और स्थानीय जनप्रतिनिधियों के साथ चुनावी मुद्दों पर चर्चा की।
दूधेश्वरनाथ मंदिर में जलाभिषेक
दौरे के दूसरे दिन सीएम योगी ने ऐतिहासिक सिद्धपीठ दूधेश्वरनाथ मंदिर पहुंचकर भगवान शिव की पूजा-अर्चना की और जलाभिषेक किया। यह मंदिर पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के हिंदुओं की आस्था का बड़ा केंद्र है। विशेषज्ञों के अनुसार, विकास के साथ-साथ आस्था को जोड़कर भाजपा अपने पारंपरिक कोर वोटरों को फिर से लामबंद करने का प्रयास कर रही है।
2027 चुनाव के लिए रणनीतिक दौरा
साल 2024 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पश्चिमी यूपी में कुछ सीटों पर झटका लगा था। किसान आंदोलन और स्थानीय नाराजगी के चलते जाट-किसान बेल्ट में पार्टी को नुकसान हुआ था। ऐसे में मुख्यमंत्री का गाजियाबाद, शामली और बिजनौर का यह दौरा 2027 की लड़ाई के लिए भाजपा की तैयारी का संकेत माना जा रहा है। कानून व्यवस्था, विकास कार्यों और सीधे संवाद के जरिए पार्टी विपक्षी गठबंधन के समीकरणों को चुनौती देने की कोशिश में है।







