भोपाल में नो यूपीआई डे: व्यापारियों ने क्यूआर से भुगतान नहीं लिया, 16 अक्टूबर से पूरी तरह बंद करने की चेतावनी

भोपाल में यूपीआई भुगतान पर 0.4 प्रतिशत व्यापारी छूट शुल्क के विरोध में किराना और चावल-दाल व्यापारियों ने 8 अक्टूबर को नो यूपीआई डे मनाया। कई बाजारों में व्यापारियों ने क्यूआर कोड से भुगतान स्वीकार नहीं किया। भोपाल किराना व्यापारी महासंघ ने कहा कि मांग नहीं मानी गई तो 16 अक्टूबर से यूपीआई भुगतान पूरी तरह बंद कर दिया जाएगा।

भोपाल के किराना, चावल और दाल व्यापारियों ने गुरुवार को यूपीआई भुगतान पर प्रस्तावित 0.4 प्रतिशत व्यापारी छूट शुल्क के विरोध में नो यूपीआई डे मनाया। सांकेतिक विरोध के तहत कई बाजारों में व्यापारियों ने ग्राहकों से यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं किया, किराना व्यापारी महासंघ के महामंत्री विवेक साहू के अनुसार व्यापारियों का औसत मुनाफा करीब एक प्रतिशत है। इसमें से 0.4 प्रतिशत शुल्क चला जाएगा तो बचा मुनाफा और कम हो जाएगा। दुकान का किराया, कर्मचारियों का खर्च और अन्य कारोबारी खर्च भी उठाने पड़ते हैं। ऐसे में अतिरिक्त शुल्क व्यापारियों के लिए बड़ी परेशानी बन सकता है।

डिजिटल भुगतान के खिलाफ नहीं व्यापारी

विवेक साहू ने स्पष्ट किया कि व्यापारी डिजिटल भुगतान के विरोधी नहीं हैं। पिछले कुछ वर्षों में शहरों से लेकर छोटे कस्बों तक व्यापारियों ने यूपीआई को अपनाया है। इससे ग्राहकों के लिए भुगतान आसान हुआ और व्यापारियों के लिए नकदी रखने की परेशानी कम हुई। उन्होंने कहा कि व्यापारियों ने डिजिटल इंडिया की पहल में सहयोग किया है। अब इसी व्यवस्था पर शुल्क लगाने से छोटे और मध्यम व्यापारियों पर असर पड़ेगा। व्यापारियों की मांग है कि सरकार उनके मुनाफे और कारोबार की वास्तविक स्थिति को देखते हुए शुल्क लगाने के फैसले पर दोबारा विचार करे।

16 अक्टूबर से बड़ा फैसला संभव

व्यापारियों ने फिलहाल 8 अक्टूबर को सांकेतिक रूप से यूपीआई भुगतान स्वीकार नहीं करने का फैसला लिया है। विवेक साहू ने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने मांग पर विचार नहीं किया तो 16 अक्टूबर से यूपीआई के जरिए भुगतान स्वीकार नहीं किया जाएगा। विरोध शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से हो रहा है। उद्देश्य डिजिटल भुगतान व्यवस्था को खत्म करना नहीं, बल्कि प्रस्तावित शुल्क का विरोध करना है।

चावल-दाल व्यापारी संघ, हनुमानगंज-जुमेराती के अध्यक्ष महेश रामख्यानी ने भी समर्थन जताया। उन्होंने कहा कि कारोबार में मुनाफे की गुंजाइश पहले से सीमित है। अतिरिक्त शुल्क लगाने से व्यापार की लागत और व्यापारी की कमाई पर सीधा असर पड़ेगा। डिजिटल भुगतान ने कारोबार को गति दी है और ग्राहकों को सुविधा मिली है, लेकिन शुल्क से आर्थिक बोझ बढ़ेगा। इसलिए सरकार को इस फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।

यदि मांग नहीं मानी गई तो आगे की रणनीति व्यापारी संगठन, वाणिज्य मंडल और संबंधित संगठनों से चर्चा के बाद तय की जाएगी। फिलहाल विरोध सांकेतिक है, लेकिन मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया तो आंदोलन आगे बढ़ाया जा सकता है।

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  • इसरत फातिमा 7 वर्षों के अनुभव वाली एक पेशेवर पत्रकार और कंटेंट राइटर हैं। वह राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय समाचार, राजनीति, व्यवसाय, शेयर बाजार, क्रिप्टोकरेंसी, प्रौद्योगिकी, शिक्षा, स्वास्थ्य, मनोरंजन और सरकारी योजनाओं सहित विभिन्न विषयों पर शोध-आधारित लेख लिखती हैं। उनका उद्देश्य पाठकों तक सटीक, निष्पक्ष और विश्वसनीय जानकारी सरल भाषा में पहुँचाना है।

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