मध्य प्रदेश की आतंकवाद निरोधक दस्ते (ATS) ने राजधानी भोपाल से एक बड़ी कार्रवाई करते हुए 35 वर्षीय मोहम्मद फराज को गिरफ्तार किया है। MP ATS के IG डॉ. आशीष ने NDTV को बताया कि फराज पुराने भोपाल के काजी कैंप इलाके का रहने वाला है और एक डॉक्टर के क्लीनिक पर काम करता था। उसे विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां से 16 जून तक पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है।
ATS के अनुसार, फराज को एक ऐसे इंटरस्टेट नेटवर्क की अहम कड़ी माना जा रहा है, जिसे ‘लोन वुल्फ’ हमलों के लिए तैयार किया जा रहा था। जांच एजेंसियों को मिली जानकारी के अनुसार, इस ग्रुप का हैंडलर पाकिस्तान में बैठा था। उसके निर्देश साफ थे – हथियार खरीदो, तैयार रहो और जरूरत पड़ने पर विदेश जाने के लिए भी तैयार रहो।
पाकिस्तान से भेजी गई जिहादी दस्तावेजी फाइलें और डार्क ऐप्स का इस्तेमाल
NDTV को दी गई जानकारी के अनुसार, ATS ने आरोपी के मोबाइल फोन से पाकिस्तान से भेजी गई कथित जिहादी दस्तावेजी PDF फाइलें बरामद करने का दावा किया है। फराज सिर्फ डिजिटल कट्टरपंथी सामग्री तक सीमित नहीं था, बल्कि वह मार्शल आर्ट की ट्रेनिंग भी ले रहा था और कुछ डार्क ऐप्स के जरिए संदिग्ध ग्रुप्स से जुड़ा हुआ था। ATS को सूचना मिली थी कि फराज एक पाकिस्तानी WhatsApp ग्रुप से जुड़ा है। पूछताछ में फराज ने बताया कि वह पिछले 5-6 साल से देवबंद निवासी नईम अब्दुल्ला के संपर्क में था, जिसने उसे पाकिस्तानी हैंडलर से जोड़ा।
मदरसे से जुड़े संपर्क, पासपोर्ट और अफगानिस्तान जाने की तैयारी
जांच में देवबंद के एक मदरसे से जुड़े संपर्कों की जानकारी भी सामने आई है। ATS सूत्रों के अनुसार, फराज को टारगेट किलिंग और लोन वुल्फ हमलों के लिए मानसिक रूप से तैयार किया जा रहा था। उसने पाकिस्तानी हैंडलर के निर्देश पर अपना पासपोर्ट बनवा लिया था और विशेष प्रशिक्षण के लिए अफगानिस्तान जाने की तैयारी में था। IG डॉ. आशीष ने NDTV को बताया कि फराज के खिलाफ BNS की धारा 152 और UAPA की धारा 13(1)(B) व 18 के तहत केस दर्ज किया गया है। नईम अब्दुल्ला की तलाश जारी है। यह पूरी कार्रवाई इतनी गोपनीय रखी गई कि भोपाल पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों को भी इसकी जानकारी नहीं दी गई थी
एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं
फराज सिर्फ एक कट्टरपंथी युवक था या किसी बड़े मॉड्यूल का हिस्सा। NDTV को एजेंसी के सूत्रों से यह जानकारी मिली है कि फिलहाल पूछताछ में तीन बड़े सवालों के जवाब तलाशे जा रहे हैं – पाकिस्तानी हैंडलर की पहचान, नेटवर्क का विस्तार और हमलों की तैयारी की जमीनी हकीकत।
