लखनऊ नगर निगम ने रविवार को हाईकोर्ट के आदेशों का पालन करते हुए वकीलों के 200 से अधिक अवैध चैंबरों पर बुलडोजर चलाया। ये ढांचे सरकारी जमीन और सार्वजनिक मार्गों पर बने थे। प्रशासन का कहना है कि इससे यातायात और सुरक्षा प्रभावित हो रही थी। कार्रवाई भारी पुलिस बल की मौजूदगी में की गई।
लखनऊ में रविवार को नगर निगम और प्रशासनिक टीमों ने हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के अनुपालन में एक डिमोलिशन अभियान चलाया। यूपी सरकार के अनुसार, इस कार्रवाई में कचहरी परिसरों के आसपास सरकारी जमीन और सार्वजनिक मार्गों पर अनधिकृत रूप से बनाए गए वकीलों के 200 से अधिक चैंबर और तंबुओं को हटाया गया। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में यह अभियान पूरा किया गया, प्रशासन के अनुसार, इन अवैध ढांचों के कारण यातायात व्यवस्था और सुरक्षा प्रभावित हो रही थी। मामले से जुड़े मुकदमों और पूर्व के अदालती आदेशों के बाद यह कदम उठाया गया है। यूपी सरकार का पक्ष है कि कचहरी परिसरों के आसपास की सरकारी जमीन पर ये निर्माण अनाधिकृत थे।
कार्रवाई को लेकर क्या हैं राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले हुई इस कार्रवाई को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा शुरू हो गई है। वकीलों का एक वर्ग इस अचानक हुई कार्रवाई से नाराज बताया जा रहा है। विपक्षी दल इसे सरकार की बुलडोजर संस्कृति और बिना वैकल्पिक व्यवस्था दिए कामकाजी तबके पर कार्रवाई का मुद्दा बना सकते हैं।
दूसरी ओर, सत्तारूढ़ दल और प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई किसी राजनीतिक उद्देश्य से नहीं की गई है। यह माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों के पालन और शहर के सुनियोजित विकास तथा अतिक्रमण मुक्ति अभियान के तहत की गई है, कुल मिलाकर, हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुपालन में हुई यह कार्रवाई प्रशासन की सख्ती और न्यायपालिका के आदेशों के पालन की बहस को फिर से केंद्र में लाई है।







