भोपाल में मानसून की पहली बड़ी बारिश ने गर्मी से राहत दी, लेकिन शहर के कमजोर ड्रेनेज सिस्टम की खामियां उजागर कर दीं। 24 घंटे में 175.6 मिमी बारिश दर्ज हुई, जो पिछले तीन साल की एक दिन की सबसे अधिक बारिश है। कई इलाकों में जलभराव हो गया। ऊपरी झील का जलस्तर भी बढ़ा। पूरे प्रदेश में नदियां उफान पर हैं और प्रशासन ने अलर्ट जारी रखा है।
भोपाल में लंबे सूखे के बाद आई भारी बारिश ने लोगों को गर्मी से राहत तो दी, लेकिन परेशानी भी बढ़ाई। शहर के पुराने इलाकों, नए उपनगरों और कॉलोनियों के निचले हिस्सों में जलभराव हो गया। इससे आम लोगों का जीवन प्रभावित हुआ। भारी बारिश ने ड्रेनेज और सिविक सिस्टम की कमजोरियों को साफ दिखा दिया।
मौसम विभाग के अनुसार सोमवार सुबह तक 24 घंटों में भोपाल में 175.6 मिमी बारिश हुई। यह पिछले तीन वर्षों में एक दिन की सबसे ज्यादा बारिश है। इस बारिश के बाद शहर अतिरिक्त बारिश वाली श्रेणी में पहुंच गया है। एक जून से अब तक भोपाल में कुल 748.7 मिमी बारिश हो चुकी है।
ऊपरी झील और ईंटखेड़ी की स्थिति
बारिश का असर ऊपरी झील पर भी पड़ा। सोमवार शाम चार बजे तक झील का जलस्तर करीब डेढ़ फीट बढ़कर 1661.5 फीट हो गया। ईंटखेड़ी इलाके में सबसे ज्यादा परेशानी हुई। कई घरों और सड़कों पर पानी भर गया। स्थानीय पुलिस थाने में भी पानी घुस गया, जिससे कामकाज ठप हो गया। पुलिसकर्मियों को फाइलें और सामान ऊंची जगहों पर रखना पड़ा।
बारिश सिर्फ भोपाल तक सीमित नहीं रही। पूरे मध्य प्रदेश में नदियां, तालाब और नाले उफान पर हैं। निचले इलाकों में पानी भर गया है। राजगढ़ जिले के खिलचीपुर में बाढ़ में फंसे पांच लोगों को एनडीआरएफ की टीम ने रेस्क्यू किया। मंडला में पानी भरने के कारण 10 परिवारों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया। विदिशा के पथरिया गांव में जलभराव के बीच फंसे चार लोगों और सात मवेशियों को बचाकर सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया।
प्रशासन ने सभी जिलों को अलर्ट पर रखा है। नदी किनारे रहने वाले लोगों से सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की गई है। लोगों का कहना है कि बारिश से खेती को फायदा होगा, लेकिन शहर में हर साल होने वाले जलभराव की समस्या का स्थायी हल निकालना जरूरी है। मौसम विभाग ने अगले 48 घंटे तक भारी बारिश का अनुमान जताया है।







