सऊदी अरब ने एशियाई ग्राहकों के लिए अरब लाइट क्रूड की कीमत में प्रति बैरल 11 डॉलर की भारी कटौती की है, जिससे भारत के आयात बिल में कमी आने की उम्मीद है।
वैश्विक ऊर्जा बाजार में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम में सऊदी अरब ने एशिया को होने वाली कच्चे तेल की सप्लाई की कीमतों में बड़ी कटौती का ऐलान किया है। दुनिया के सबसे बड़े तेल निर्यातक देश ने अपने प्रमुख अरब लाइट कच्चे तेल की अगस्त माह की आपूर्ति के लिए आधिकारिक बिक्री मूल्य में प्रति बैरल 11 डॉलर की कटौती की है। विशेषज्ञों के अनुसार, यह पिछले 26 वर्षों में एशिया के लिए की गई सबसे बड़ी मासिक कटौती है।
2020 के बाद पहली बार इतनी बड़ी छूट
रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब ने वर्ष 2020 के बाद पहली बार अपने इस प्रमुख ग्रेड को ओमान-दुबई बेंचमार्क के मुकाबले 1.50 डॉलर प्रति बैरल की छूट पर उपलब्ध कराया है। यह कदम एशियाई बाजार में अपनी हिस्सेदारी बनाए रखने की रणनीति के तहत उठाया गया माना जा रहा है, खासकर जब रूस रियायती दरों पर भारत और चीन जैसे देशों को तेल बेच रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य से तेल की आवाजाही सामान्य होने और ओपेक प्लस द्वारा उत्पादन बढ़ाने के फैसले के बाद यह कटौती संभव हो सकी है।
भारत के आयात बिल पर पड़ेगा सकारात्मक असर
भारत अपनी कुल कच्चे तेल की जरूरत का लगभग 85 प्रतिशत आयात करता है। मणिकंट्रोल रिपोर्ट के अनुसार, अप्रैल-मई 2026 के दौरान भारत ने 35.5 अरब डॉलर (लगभग 337,970 करोड़ रुपये) मूल्य का कच्चा तेल आयात किया था। सऊदी अरब की इस कीमत कटौती और होर्मुज से जहाजों की आवाजाही सुचारू होने से आयात बिल में कमी आने की संभावना है। इसका लाभ विमानन, परिवहन, लॉजिस्टिक्स, मैन्युफैक्चरिंग और पेट्रोकेमिकल जैसे उद्योगों को भी मिल सकता है।
हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि कच्चे तेल की कीमत कम होने का मतलब पेट्रोल और डीजल का तुरंत सस्ता होना नहीं है। भारत में खुदरा ईंधन की कीमतें अंतरराष्ट्रीय कीमत, रुपये-डॉलर की विनिमय दर, रिफाइनिंग मार्जिन, मालभाड़ा और सरकारी करों सहित कई कारकों पर निर्भर करती हैं। इसलिए लंबे समय तक अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल सस्ता बना रहे और कंपनियां इसका लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचाएं, तभी ईंधन की कीमतों में राहत मिल सकती है।

