वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद को लेकर नोटिसों का खेल, भ्रम की स्थिति

वाराणसी में गंज शहीदा मस्जिद को लेकर असमंजस की स्थिति है। रेलवे ने 13 जून को मस्जिद हटाने का नोटिस दिया था, लेकिन अचानक एक और नोटिस आया जिसमें पहले वाले को रद्द करने की बात कही गई। हालांकि, रेलवे कर्मचारी ने इसे फर्जी बताकर हटा दिया, जिससे विवाद गहरा गया।

वाराणसी: वाराणसी की गंज शहीदा मस्जिद को लेकर नोटिसों के आदान-प्रदान से भ्रम और विवाद की स्थिति पैदा हो गई है। प्रशासन की मंशा को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि आखिर यह मस्जिद टूटेगी या रहेगी। यह पूरा मामला तब सामने आया जब मस्जिद पर पहले से लगे रेलवे के नोटिस के ऊपर ही एक नया नोटिस चस्पा हो गया।

13 जून को मिला था नोटिस

गंज शाहिदा मस्जिद पर बीती 13 जून को रेलवे ने एक नोटिस लगाया था, जिसमें 20 जून तक मस्जिद हटाने की मोहलत दी गई थी। नोटिस में कहा गया था कि 350 करोड़ रुपये की लागत से हो रहे काशी रेलवे स्टेशन पुनर्विकास कार्य की जद में रेलवे भूमि पर स्थित यह मस्जिद आ रही है।

नया नोटिस और उसे हटाने का विवाद

इसी बीच, मस्जिद पर अचानक एक और नोटिस चिपका मिला। इस नोटिस में रेलवे ने अपने ही 13 जून के नोटिस को तत्काल प्रभाव से रद्द करने की बात कही। हालांकि, दोनों ही नोटिस पर रेलवे की आधिकारिक मोहर नहीं लगी थी। विवाद और गहरा हो गया जब एक घंटे बाद खुद को रेलवे कर्मचारी बताने वाले सुनील नामक व्यक्ति वहां पहुंचा और निरस्तीकरण वाले नोटिस को हटाते हुए उसे फर्जी बताने लगा। कर्मचारी ने कहा कि यह नोटिस भ्रामक था और किसी अज्ञात व्यक्ति ने इसे लगाया था। इस घटना के बाद मौके पर लोग जमा हो गए और विवाद शुरू हो गया।

मस्जिद के पक्ष का कहना

गंज शाहिदा मस्जिद को अंजुमन इंतजामिया ने 900 साल पुरानी बताया है। मुफ्ती-ए-शहर मौलाना अब्दुल बातिन नोमानी ने कहा कि नया नोटिस लगाया गया था, लेकिन बाद में उसे हटा दिया गया। उन्होंने यह भी कहा कि नोटिस किसने हटाया, इसकी उन्हें जानकारी नहीं है। रेलवे की ओर से अभी कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

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