बीकानेर पीबीएम अस्पताल में एक और प्रसूता की मौत, कोटा के बाद अब राजस्थान में दूसरा मामला

बीकानेर के पीबीएम अस्पताल में इलाजरत प्रसूता प्रीति की करीब एक माह बाद मौत हो गई। अस्पताल अधीक्षक ने मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर को प्रथम दृष्टया मौत का कारण बताया है। पिछले महीने इसी अस्पताल में प्रसव के बाद छह महिलाओं की तबीयत बिगड़ने के मामले सामने आए थे। इससे पहले कोटा में पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जिसके बाद राज्य में मातृ मृत्यु दर को लेकर सवाल उठ रहे हैं।

बीकानेर के प्रमुख सरकारी अस्पताल पीबीएम (पीडब्ल्यू बी) में एक प्रसूता प्रीति ने इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। रिपोर्ट के अनुसार, वह पिछले लगभग एक माह से अस्पताल के आईसीयू (गहन चिकित्सा कक्ष) में वेंटिलेटर सपोर्ट पर थी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. बी.सी. घीया ने मौत की पुष्टि करते हुए बताया कि प्रारंभिक तौर पर मल्टीपल ऑर्गन फेल्योर (कई अंगों का काम करना बंद कर देना) को मृत्यु का कारण माना जा रहा है, हालांकि विस्तृत जांच जारी है।

छह महिलाओं की बिगड़ी थी तबीयत

यह घटना पिछले महीने हुए एक और मामले की पृष्ठभूमि में सामने आई है, जब अस्पताल के प्रसूति विभाग में प्रसव के बाद छह महिलाओं की अचानक हालत बिगड़ गई थी। तब स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच के लिए समितियों का गठन किया था और दवाओं, संक्रमण नियंत्रण व्यवस्था तथा उपचार प्रक्रिया की समीक्षा की थी, परंतु जांच रिपोर्ट को लेकर अभी भी सवाल बने हैं। बीकानेर में यह किडनी फेल्योर से जुड़े मामले में पहली मौत है।

कोटा की घटना के बाद राजनीतिक हलचल

उल्लेखनीय है कि इससे पहले उपलब्ध जानकारी के अनुसार, राजस्थान के कोटा में भी पांच प्रसूताओं की मौत हो चुकी है, जिसके बाद प्रदेश में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं। इस बीच, कांग्रेस नेता बिशनाराम सियाग ने प्रीति की मौत को पीबीएम अस्पताल प्रशासन की लापरवाही का नतीजा बताते हुए उच्च स्तरीय जांच और व्यवस्थाओं में सुधार की मांग की है।

प्रीति की मौत ने एक बार फिर पीबीएम अस्पताल की चिकित्सा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जहां एक ओर परिजन और विपक्षी दल सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं, वहीं सरकार और प्रशासन पर अपनी कार्यप्रणाली की पारदर्शी जांच और आगामी कदम उठाकर विश्वसनीयता बहाल करने का दबाव है। अब सभी की निगाहें जांच रिपोर्ट और अस्पताल प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हैं।

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