राजा भोज एयरपोर्ट पर विमानों की सटीक लोकेशन और हवाई सुरक्षा के लिए अत्याधुनिक MSSR रडार लगाया जा रहा है। यह रडार सितंबर 2026 तक चालू हो जाएगा। इससे विमानों के टकराने का जोखिम खत्म होगा और उड़ानों की देरी में कमी आएगी। राजा भोज एयरपोर्ट पर विमानों की आवाजाही को अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बनाने के लिए एक अत्याधुनिक रडार सिस्टम लगाया जा रहा है। इस प्रणाली का नाम ‘मोनोपल्स सेकेंडरी सर्विलांस रडार’ (MSSR) है, जो सितंबर 2026 तक पूरी तरह चालू हो जाएगा।
क्या है MSSR रडार और क्यों है जरूरी?
यह नया रडार एयरपोर्ट के पुराने बुनियादी ढांचे को अपग्रेड करने की बड़ी योजना का हिस्सा है। MSSR रडार मौजूदा सिस्टम की तुलना में कहीं अधिक सटीकता से विमानों की स्थिति और पहचान बता सकता है। यह रीयल-टाइम डेटा मुहैया कराएगा, जिससे एयर ट्रैफिक कंट्रोलर आसमान की वास्तविक स्थिति बेहतर ढंग से समझ सकेंगे। राजा भोज एयरपोर्ट के निदेशक रामजी अवस्थी के अनुसार, इस रडार से आपात स्थिति में प्रतिक्रिया का समय घटेगा और विमानों की गलत पहचान का जोखिम पूरी तरह खत्म हो जाएगा।
हवाई सुरक्षा और उड़ानों पर क्या असर होगा?
नए रडार से सबसे बड़ा फायदा अधिकारियों के अनुसार, ‘कोलिजन-अवॉयडेंस’ यानी विमानों को आपस में टकराने से रोकने में मदद मिलेगी। साथ ही यह पड़ोसी एयरस्पेस के साथ बेहतर तालमेल भी बनाएगा। इसके अलावा, व्यस्त समय में रनवे पर विमानों के उतरने और उड़ान भरने के क्रम को बेहतर ढंग से व्यवस्थित किया जा सकेगा। इससे व्यावसायिक और सामान्य विमानों का परिचालन सुगम होगा और उड़ानों में ऑपरेशनल देरी कम आएगी।
